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Bible English Sentence बाइबिल हिन्दी सेंटेंस
CHAPTER 26 अध्याय 26
Ch-25 == Ch-27
1 And there was a famine in the land, beside the first famine that was in the days of Abraham. And Isaac went unto Abimelech king of the Philistines unto Gerar. 1 और उस देश में अकाल पड़ा, वह उस पहिले अकाल से अलग था जो इब्राहीम के दिनों में पड़ा था। सो इसहाक गरार को पलिश्तियों के राजा अबीमेलेक के पास गया।
2 And the LORD appeared unto him, and said, Go not down into Egypt; dwell in the land which I shall tell thee of: 2 वहां यहोवा ने उसको दर्शन देकर कहा, मिस्र में मत जा; जो देश मैं तुझे बताऊं उसी में रह।
3 Sojourn in this land, and I will be with thee, and will bless thee; for unto thee, and unto thy seed, I will give all these countries, and I will perform the oath which I sware unto Abraham thy father; 3 तू इसी देश में रह, और मैं तेरे संग रहूंगा, और तुझे आशीष दूंगा; और ये सब देश मैं तुझ को, और तेरे वंश को दूंगा; और जो शपथ मैं ने तेरे पिता इब्राहीम से खाई थी, उसे मैं पूरी करूंगा।
4 And I will make thy seed to multiply as the stars of heaven, and will give unto thy seed all these countries; and in thy seed shall all the nations of the earth be blessed; 4 और मैं तेरे वंश को आकाश के तारागण के समान करूंगा। और मैं तेरे वंश को ये सब देश दूंगा, और पृथ्वी की सारी जातियां तेरे वंश के कारण अपने को धन्य मानेंगी।
5 Because that Abraham obeyed my voice, and kept my charge, my commandments, my statutes, and my laws. 5 क्योंकि इब्राहीम ने मेरी मानी, और जो मैं ने उसे सौंपा था उसको और मेरी आज्ञाओं विधियों, और व्यवस्था का पालन किया।
6 And Isaac dwelt in Gerar: 6 सो इसहाक गरार में रह गया।
7 And the men of the place asked him of his wife; and he said, She is my sister: for he feared to say, She is my wife; lest, said he, the men of the place should kill me for Rebekah; because she was fair to look upon. 7 जब उस स्थान के लोगों ने उसकी पत्नी के विषय में पूछा, तब उसने यह सोच कर कि यदि मैं उसको अपनी पत्नी कहूं, तो यहां के लोग रिबका के कारण जो परमसुन्दरी है मुझ को मार डालेंगे, उत्तर दिया, वह तो मेरी बहिन है।
8 And it came to pass, when he had been there a long time, that Abimelech king of the Philistines looked out at a window, and saw, and, behold, Isaac was sporting with Rebekah his wife. 8 जब उसको वहां रहते बहुत दिन बीत गए, तब एक दिन पलिश्तियों के राजा अबीमेलेक ने खिड़की में से झांक के क्या देखा, कि इसहाक अपनी पत्नी रिबका के साथ क्रीड़ा कर रहा है।
9 And Abimelech called Isaac, and said, Behold, of a surety she is thy wife: and how saidst thou, She is my sister? And Isaac said unto him, Because I said, Lest I die for her. 9 तब अबीमेलेक ने इसहाक को बुलवा कर कहा, वह तो निश्चय तेरी पत्नी है; फिर तू ने क्योंकर उसको अपनी बहिन कहा? इसहाक ने उत्तर दिया, मैं ने सोचा था, कि ऐसा न हो कि उसके कारण मेरी मृत्यु हो।
10 And Abimelech said, What is this thou hast done unto us? one of the people might lightly have lien with thy wife, and thou shouldest have brought guiltiness upon us. 10 अबीमेलेक ने कहा, तू ने हम से यह क्या किया? ऐसे तो प्रजा में से कोई तेरी पत्नी के साथ सहज से कुकर्म कर सकता, और तू हम को पाप में फंसाता।
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11 And Abimelech charged all his people, saying, He that toucheth this man or his wife shall surely be put to death. 11 और अबीमेलेक ने अपनी सारी प्रजा को आज्ञा दी, कि जो कोई उस पुरूष को वा उस स्त्री को छूएगा, सो निश्चय मार डाला जाएगा।
12 Then Isaac sowed in that land, and received in the same year an hundredfold: and the LORD blessed him. 12 फिर इसहाक ने उस देश में जोता बोया, और उसी वर्ष में सौ गुणा फल पाया: और यहोवा ने उसको आशीष दी।
13 And the man waxed great, and went forward, and grew until he became very great: 13 और वह बढ़ा और उसकी उन्नति होती चली गई, यहां तक कि वह अति महान पुरूष हो गया।
14 For he had possession of flocks, and possession of herds, and great store of servants: and the Philistines envied him. 14 जब उसके भेड़-बकरी, गाय-बैल, और बहुत से दास-दासियां हुई, तब पलिश्ती उससे डाह करने लगे।
15 For all the wells which his father's servants had digged in the days of Abraham his father, the Philistines had stopped them, and filled them with earth. 15 सो जितने कुओं को उसके पिता इब्राहीम के दासों ने इब्राहीम के जीते जी खोदा था, उन को पलिश्तियों ने मिट्टी से भर दिया।
16 And Abimelech said unto Isaac, Go from us; for thou art much mightier than we. 16 तब अबीमेलेक ने इसहाक से कहा, हमारे पास से चला जा; क्योंकि तू हम से बहुत सामर्थी हो गया है।
17 And Isaac departed thence, and pitched his tent in the valley of Gerar, and dwelt there. 17 सो इसहाक वहां से चला गया, और गरार के नाले में तम्बू खड़ा करके वहां रहने लगा।
18 And Isaac digged again the wells of water, which they had digged in the days of Abraham his father; for the Philistines had stopped them after the death of Abraham: and he called their names after the names by which his father had called them. 18 तब जो कुएं उसके पिता इब्राहीम के दिनों में खोदे गए थे, और इब्राहीम के मरने के पीछे पलिश्तियों ने भर दिए थे, उन को इसहाक ने फिर से खुदवाया; और उनके वे ही नाम रखे, जो उसके पिता ने रखे थे।
19 And Isaac's servants digged in the valley, and found there a well of springing water. 19 फिर इसहाक के दासों को नाले में खोदते खोदते बहते जल का एक सोता मिला।
20 And the herdmen of Gerar did strive with Isaac's herdmen, saying, The water is ours: and he called the name of the well Esek; because they strove with him. 20 तब गरारी चरवाहों ने इसहाक के चरवाहों से झगड़ा किया, और कहा, कि यह जल हमारा है। सो उसने उस कुएं का नाम एसेक रखा इसलिये कि वे उससे झगड़े थे।
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21 And they digged another well, and strove for that also: and he called the name of it Sitnah. 21 फिर उन्होंने दूसरा कुआं खोदा; और उन्होंने उसके लिये भी झगड़ा किया, सो उसने उसका नाम सित्रा रखा।
22 And he removed from thence, and digged another well; and for that they strove not: and he called the name of it Rehoboth; and he said, For now the LORD hath made room for us, and we shall be fruitful in the land. 22 तब उसने वहां से कूच करके एक और कुआं खुदवाया; और उसके लिये उन्होंने झगड़ा न किया; सो उसने उसका नाम यह कह कर रहोबोत रखा, कि अब तो यहोवा ने हमारे लिये बहुत स्थान दिया है, और हम इस देश में फूलें-फलेंगे।
23 And he went up from thence to Beersheba. 23 वहां से वह बेर्शेबा को गया।
24 And the LORD appeared unto him the same night, and said, I am the God of Abraham thy father: fear not, for I am with thee, and will bless thee, and multiply thy seed for my servant Abraham's sake. 24 और उसी दिन यहोवा ने रात को उसे दर्शन देकर कहा, मैं तेरे पिता इब्राहीम का परमेश्वर हूं; मत डर, क्योंकि मैं तेरे साथ हूं, और अपने दास इब्राहीम के कारण तुझे आशीष दूंगा, और तेरा वंश बढ़ाऊंगा
25 And he builded an altar there, and called upon the name of the LORD, and pitched his tent there: and there Isaac's servants digged a well. 25 तब उसने वहां एक वेदी बनाई, और यहोवा से प्रार्थना की, और अपना तम्बू वहीं खड़ा किया; और वहां इसहाक के दासों ने एक कुआं खोदा।
26 Then Abimelech went to him from Gerar, and Ahuzzath one of his friends, and Phichol the chief captain of his army. 26 तब अबीमेलेक अपने मित्र अहुज्जत, और अपने सेनापति पीकोल को संग ले कर, गरार से उसके पास गया।
27 And Isaac said unto them, Wherefore come ye to me, seeing ye hate me, and have sent me away from you? 27 इसहाक ने उन से कहा, तुम ने मुझ से बैर करके अपने बीच से निकाल दिया था; सो अब मेरे पास क्यों आए हो?
28 And they said, We saw certainly that the LORD was with thee: and we said, Let there be now an oath betwixt us, even betwixt us and thee, and let us make a covenant with thee; 28 उन्होंने कहा, हम ने तो प्रत्यक्ष देखा है, कि यहोवा तेरे साथ रहता है: सो हम ने सोचा, कि तू तो यहोवा की ओर से धन्य है, सो हमारे तेरे बीच में शपथ खाई जाए, और हम तुझ से इस विषय की वाचा बन्धाएं;
29 That thou wilt do us no hurt, as we have not touched thee, and as we have done unto thee nothing but good, and have sent thee away in peace: thou art now the blessed of the LORD. 29 कि जैसे हम ने तुझे नहीं छूआ, वरन तेरे साथ निरी भलाई की है, और तुझ को कुशल क्षेम से विदा किया, उसके अनुसार तू भी हम से कोई बुराई न करेगा।
30 And he made them a feast, and they did eat and drink. 30 तब उसने उनकी जेवनार की, और उन्होंने खाया पिया।
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31 And they rose up betimes in the morning, and sware one to another: and Isaac sent them away, and they departed from him in peace. 31 बिहान को उन सभों ने तड़के उठ कर आपस में शपथ खाई; तब इसहाक ने उन को विदा किया, और वे कुशल क्षेम से उसके पास से चले गए।
32 And it came to pass the same day, that Isaac's servants came, and told him concerning the well which they had digged, and said unto him, We have found water. 32 उसी दिन इसहाक के दासों ने आकर अपने उस खोदे हुए कुएं का वृत्तान्त सुना के कहा, कि हम को जल का एक सोता मिला है।
33 And he called it Shebah: therefore the name of the city is Beersheba unto this day. 33 तब उसने उसका नाम शिबा रखा: इसी कारण उस नगर का नाम आज तक बेर्शेबा पड़ा है॥
34 And Esau was forty years old when he took to wife Judith the daughter of Beeri the Hittite, and Bashemath the daughter of Elon the Hittite: 34 जब ऐसाव चालीस वर्ष का हुआ, तब उसने हित्ती बेरी की बेटी यहूदीत, और हित्ती एलोन की बेटी बाशमत को ब्याह लिया।
35 Which were a grief of mind unto Isaac and to Rebekah. 35 और इन स्त्रियों के कारण इसहाक और रिबका के मन को खेद हुआ॥
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