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Bible English Sentence बाइबिल हिन्दी सेंटेंस
CHAPTER 43 अध्याय 43
(Ch-42 ) Previous == == Next ( Ch-44)
1 And the famine was sore in the land. 1 और अकाल देश में और भी भयंकर होता गया।
2 And it came to pass, when they had eaten up the corn which they had brought out of Egypt, their father said unto them, Go again, buy us a little food. 2 जब वह अन्न जो वे मिस्र से ले आए थे समाप्त हो गया तब उनके पिता ने उन से कहा, फिर जा कर हमारे लिये थोड़ी सी भोजनवस्तु मोल ले आओ।
3 And Judah spake unto him, saying, The man did solemnly protest unto us, saying, Ye shall not see my face, except your brother be with you. 3 तब यहूदा ने उससे कहा, उस पुरूष ने हम को चितावनी देकर कहा, कि यदि तुम्हारा भाई तुम्हारे संग न आए, तो तुम मेरे सम्मुख न आने पाओगे।
4 If thou wilt send our brother with us, we will go down and buy thee food: 4 इसलिये यदि तू हमारे भाई को हमारे संग भेजे, तब तो हम जा कर तेरे लिये भोजनवस्तु मोल ले आएंगे;
5 But if thou wilt not send him, we will not go down: for the man said unto us, Ye shall not see my face, except your brother be with you. 5 परन्तु यदि तू उसको न भेजे, तो हम न जाएंगे: क्योंकि उस पुरूष ने हम से कहा, कि यदि तुम्हारा भाई तुम्हारे संग न हो, तो तुम मेरे सम्मुख न आने पाओगे।
6 And Israel said, Wherefore dealt ye so ill with me, as to tell the man whether ye had yet a brother? 6 तब इस्राएल ने कहा, तुम ने उस पुरूष को यह बताकर कि हमारा एक और भाई है, क्यों मुझ से बुरा बर्ताव किया?
7 And they said, The man asked us straitly of our state, and of our kindred, saying, Is your father yet alive? have ye another brother? and we told him according to the tenor of these words: could we certainly know that he would say, Bring your brother down? 7 उन्होंने कहा, जब उस पुरूष ने हमारी और हमारे कुटुम्बियों की दशा को इस रीति पूछा, कि क्या तुम्हारा पिता अब तक जीवित है? क्या तुम्हारे कोई और भाई भी है? तब हम ने इन प्रश्नों के अनुसार उससे वर्णन किया; फिर हम क्या जानते थे कि वह कहेगा, कि अपने भाई को यहां ले आओ।
8 And Judah said unto Israel his father, Send the lad with me, and we will arise and go; that we may live, and not die, both we, and thou, and also our little ones. 8 फिर यहूदा ने अपने पिता इस्राएल से कहा, उस लड़के को मेरे संग भेज दे, कि हम चले जाएं; इस से हम, और तू, और हमारे बालबच्चे मरने न पाएंगे, वरन जीवित रहेंगे।
9 I will be surety for him; of my hand shalt thou require him: if I bring him not unto thee, and set him before thee, then let me bear the blame for ever: 9 मैं उसका जामिन होता हूं; मेरे ही हाथ से तू उसको फेर लेना: यदि मैं उसको तेरे पास पहुंचाकर साम्हने न खड़ाकर दूं, तब तो मैं सदा के लिये तेरा अपराधी ठहरूंगा।
10 For except we had lingered, surely now we had returned this second time. 10 यदि हम लोग विलम्ब न करते, तो अब तब दूसरी बार लौट आते।
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11 And their father Israel said unto them, If it must be so now, do this; take of the best fruits in the land in your vessels, and carry down the man a present, a little balm, and a little honey, spices, and myrrh, nuts, and almonds: 11 तब उनके पिता इस्राएल ने उन से कहा, यदि सचमुच ऐसी ही बात है, तो यह करो; इस देश की उत्तम उत्तम वस्तुओं में से कुछ कुछ अपने बोरों में उस पुरूष के लिये भेंट ले जाओ: जैसे थोड़ा सा बलसान, और थोड़ा सा मधु, और कुछ सुगन्ध द्रव्य, और गन्धरस, पिस्ते, और बादाम।
12 And take double money in your hand; and the money that was brought again in the mouth of your sacks, carry it again in your hand; peradventure it was an oversight: 12 फिर अपने अपने साथ दूना रूपया ले जाओ; और जो रूपया तुम्हारे बोरों के मुंह पर रखकर फेर दिया गया था, उसको भी लेते जाओ; कदाचित यह भूल से हुआ हो।
13 Take also your brother, and arise, go again unto the man: 13 और अपने भाई को भी संग ले कर उस पुरूष के पास फिर जाओ,
14 And God Almighty give you mercy before the man, that he may send away your other brother, and Benjamin. If I be bereaved of my children, I am bereaved. 14 और सर्वशक्तिमान ईश्वर उस पुरूष को तुम पर दयालु करेगा, जिस से कि वह तुम्हारे दूसरे भाई को और बिन्यामीन को भी आने दे: और यदि मैं निर्वंश हुआ तो होने दो।
15 And the men took that present, and they took double money in their hand, and Benjamin; and rose up, and went down to Egypt, and stood before Joseph. 15 तब उन मनुष्यों ने वह भेंट, और दूना रूपया, और बिन्यामीन को भी संग लिया, और चल दिए और मिस्र में पहुंचकर यूसुफ के साम्हने खड़े हुए।
16 And when Joseph saw Benjamin with them, he said to the ruler of his house, Bring these men home, and slay, and make ready; for these men shall dine with me at noon. 16 उनके साथ बिन्यामीन को देखकर यूसुफ ने अपने घर के अधिकारी से कहा, उन मनुष्यों को घर में पहुंचा दो, और पशु मारके भोजन तैयार करो; क्योंकि वे लोग दोपहर को मेरे संग भोजन करेंगे।
17 And the man did as Joseph bade; and the man brought the men into Joseph's house. 17 तब वह अधिकारी पुरूष यूसुफ के कहने के अनुसार उन पुरूषों को यूसुफ के घर में ले गया।
18 And the men were afraid, because they were brought into Joseph's house; and they said, Because of the money that was returned in our sacks at the first time are we brought in; that he may seek occasion against us, and fall upon us, and take us for bondmen, and our asses. 18 जब वे यूसुफ के घर को पहुंचाए गए तब वे आपस में डर कर कहने लगे, कि जो रूपया पहिली बार हमारे बोरों में फेर दिया गया था, उसी के कारण हम भीतर पहुंचाए गए हैं; जिस से कि वह पुरूष हम पर टूट पड़े, और हमें वश में करके अपने दास बनाए, और हमारे गदहों को भी छीन ले।
19 And they came near to the steward of Joseph's house, and they communed with him at the door of the house, 19 तब वे यूसुफ के घर के अधिकारी के निकट जा कर घर के द्वार पर इस प्रकार कहने लगे,
20 And said, O sir, we came indeed down at the first time to buy food: 20 कि हे हमारे प्रभु, जब हम पहिली बार अन्न मोल लेने को आए थे,
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21 And it came to pass, when we came to the inn, that we opened our sacks, and, behold, every man's money was in the mouth of his sack, our money in full weight: and we have brought it again in our hand. 21 तब हम ने सराय में पहुंचकर अपने बोरों को खोला, तो क्या देखा, कि एक एक जन का पूरा पूरा रूपया उसके बोरे के मुंह में रखा है; इसलिये हम उसको अपने साथ फिर लेते आए हैं।
22 And other money have we brought down in our hands to buy food: we cannot tell who put our money in our sacks. 22 और दूसरा रूपया भी भोजनवस्तु मोल लेने के लिये लाए हैं; हम नहीं जानते कि हमारा रूपया हमारे बोरों में किस ने रख दिया था।
23 And he said, Peace be to you, fear not: your God, and the God of your father, hath given you treasure in your sacks: I had your money. And he brought Simeon out unto them. 23 उसने कहा, तुम्हारा कुशल हो, मत डरो: तुम्हारा परमेश्वर, जो तुम्हारे पिता का भी परमेश्वर है, उसी ने तुम को तुम्हारे बोरों में धन दिया होगा, तुम्हारा रूपया तो मुझ को मिल गया था: फिर उसने शिमोन को निकाल कर उनके संग कर दिया।
24 And the man brought the men into Joseph's house, and gave them water, and they washed their feet; and he gave their asses provender. 24 तब उस जन ने उन मनुष्यों को यूसुफ के घर में ले जा कर जल दिया, तब उन्होंने अपने पांवों को धोया; फिर उसने उनके गदहों के लिये चारा दिया।
25 And they made ready the present against Joseph came at noon: for they heard that they should eat bread there. 25 तब यह सुनकर, कि आज हम को यहीं भोजन करना होगा, उन्होंने यूसुफ के आने के समय तक, अर्थात दोपहर तक, उस भेंट को इकट्ठा कर रखा।
26 And when Joseph came home, they brought him the present which was in their hand into the house, and bowed themselves to him to the earth. 26 जब यूसुफ घर आया तब वे उस भेंट को, जो उनके हाथ में थी, उसके सम्मुख घर में ले गए, और भूमि पर गिरकर उसको दण्डवत किया।
27 And he asked them of their welfare, and said, Is your father well, the old man of whom ye spake? Is he yet alive? 27 उसने उनका कुशल पूछा, और कहा, क्या तुम्हारा बूढ़ा पिता, जिसकी तुम ने चर्चा की थी, कुशल से है? क्या वह अब तक जीवित है?
28 And they answered, Thy servant our father is in good health, he is yet alive. And they bowed down their heads, and made obeisance. 28 उन्होंने कहा, हां तेरा दास हमारा पिता कुशल से है और अब तक जीवित है; तब उन्होंने सिर झुका कर फिर दण्डवत किया।
29 And he lifted up his eyes, and saw his brother Benjamin, his mother's son, and said, Is this your younger brother, of whom ye spake unto me? And he said, God be gracious unto thee, my son. 29 तब उसने आंखे उठा कर और अपने सगे भाई बिन्यामीन को देखकर पूछा, क्या तुम्हारा वह छोटा भाई, जिसकी चर्चा तुम ने मुझ से की थी, यही है? फिर उसने कहा, हे मेरे पुत्र, परमेश्वर तुझ पर अनुग्रह करे।
30 And Joseph made haste; for his bowels did yearn upon his brother: and he sought where to weep; and he entered into his chamber, and wept there. 30 तब अपने भाई के स्नेह से मन भर आने के कारण और यह सोचकर, कि मैं कहां जा कर रोऊं, यूसुफ फुर्ती से अपनी कोठरी में गया, और वहां रो पड़ा।
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31 And he washed his face, and went out, and refrained himself, and said, Set on bread. 31 फिर अपना मुंह धोकर निकल आया, और अपने को शांत कर कहा, भोजन परोसो।
32 And they set on for him by himself, and for them by themselves, and for the Egyptians, which did eat with him, by themselves: because the Egyptians might not eat bread with the Hebrews; for that is an abomination unto the Egyptians. 32 तब उन्होंने उसके लिये तो अलग, और भाइयों के लिये भी अलग, और जो मिस्री उसके संग खाते थे, उनके लिये भी अलग, भोजन परोसा; इसलिये कि मिस्री इब्रियों के साथ भोजन नहीं कर सकते, वरन मिस्री ऐसा करना घृणा समझते थे।
33 And they sat before him, the firstborn according to his birthright, and the youngest according to his youth: and the men marvelled one at another. 33 सो यूसुफ के भाई उसके साम्हने, बड़े बड़े पहिले, और छोटे छोटे पीछे, अपनी अपनी अवस्था के अनुसार, क्रम से बैठाए गए: यह देख वे विस्मित हो कर एक दूसरे की ओर देखने लगे।
34 And he took and sent messes unto them from before him: but Benjamin's mess was five times so much as any of theirs. And they drank, and were merry with him. 34 तब यूसुफ अपने साम्हने से भोजन-वस्तुएं उठा उठाके उनके पास भेजने लगा, और बिन्यामीन को अपने भाइयों से पचगुणी अधिक भोजनवस्तु मिली। और उन्होंने उसके संग मनमाना खाया पिया।
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