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CHAPTER 46 अध्याय 46
(Ch-45 ) Previous == == Next ( Ch-47)
1 And Israel took his journey with all that he had, and came to Beersheba, and offered sacrifices unto the God of his father Isaac. 1 तब इस्राएल अपना सब कुछ ले कर कूच करके बेर्शेबा को गया, और वहां अपने पिता इसहाक के परमेश्वर को बलिदान चढ़ाए।
2 And God spake unto Israel in the visions of the night, and said, Jacob, Jacob. And he said, Here am I. 2 तब परमेश्वर ने इस्राएल से रात को दर्शन में कहा, हे याकूब हे याकूब। उसने कहा, क्या आज्ञा।
3 And he said, I am God, the God of thy father: fear not to go down into Egypt; for I will there make of thee a great nation: 3 उसने कहा, मैं ईश्वर तेरे पिता का परमेश्वर हूं, तू मिस्र में जाने से मत डर; क्योंकि मैं तुझ से वहां एक बड़ी जाति बनाऊंगा।
4 I will go down with thee into Egypt; and I will also surely bring thee up again: and Joseph shall put his hand upon thine eyes. 4 मैं तेरे संग संग मिस्र को चलता हूं; और मैं तुझे वहां से फिर निश्चय ले आऊंगा; और यूसुफ अपना हाथ तेरी आंखों पर लगाएगा।
5 And Jacob rose up from Beersheba: and the sons of Israel carried Jacob their father, and their little ones, and their wives, in the wagons which Pharaoh had sent to carry him. 5 तब याकूब बेर्शेबा से चला: और इस्राएल के पुत्र अपने पिता याकूब, और अपने बाल-बच्चों, और स्त्रियों को उन गाडिय़ों पर, जो फिरौन ने उनके ले आने को भेजी थी, चढ़ाकर चल पड़े।
6 And they took their cattle, and their goods, which they had gotten in the land of Canaan, and came into Egypt, Jacob, and all his seed with him: 6 और वे अपनी भेड़-बकरी, गाय-बैल, और कनान देश में अपने इकट्ठा किए हुए सारे धन को ले कर मिस्र में आए।
7 His sons, and his sons' sons with him, his daughters, and his sons' daughters, and all his seed brought he with him into Egypt. 7 और याकूब अपने बेटे-बेटियों, पोते-पोतियों, निदान अपने वंश भर को अपने संग मिस्र में ले आया॥
8 And these are the names of the children of Israel, which came into Egypt, Jacob and his sons: Reuben, Jacob's firstborn. 8 याकूब के साथ जो इस्राएली, अर्थात उसके बेटे, पोते, आदि मिस्र में आए, उनके नाम ये हैं: याकूब का जेठा तो रूबेन था।
9 And the sons of Reuben; Hanoch, and Phallu, and Hezron, and Carmi. 9 और रूबेन के पुत्र, हनोक, पललू, हेस्रोन, और कर्म्मी थे।
10 And the sons of Simeon; Jemuel, and Jamin, and Ohad, and Jachin, and Zohar, and Shaul the son of a Canaanitish woman. 10 और शिमोन के पुत्र, यमूएल, यामीन, ओहद, याकीन, सोहर, और एक कनानी स्त्री से जन्मा हुआ शाऊल भी था।
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11 And the sons of Levi; Gershon, Kohath, and Merari. 11 और लेवी के पुत्र, गेर्शोन, कहात, और मरारी थे।
12 And the sons of Judah; Er, and Onan, and Shelah, and Pharez, and Zerah: but Er and Onan died in the land of Canaan. And the sons of Pharez were Hezron and Hamul. 12 और यहूदा के एर, ओनान, शेला, पेरेस, और जेरह नाम पुत्र हुए तो थे; पर एर और ओनान कनान देश में मर गए थे। और पेरेस के पुत्र, हेस्त्रोन और हामूल थे।
13 And the sons of Issachar; Tola, and Phuvah, and Job, and Shimron. 13 और इस्साकार के पुत्र, तोला, पुब्बा, योब और शिम्रोन थे।
14 And the sons of Zebulun; Sered, and Elon, and Jahleel. 14 और जबूलून के पुत्र, सेरेद, एलोन, और यहलेल थे।
15 These be the sons of Leah, which she bare unto Jacob in Padanaram, with his daughter Dinah: all the souls of his sons and his daughters were thirty and three. 15 लिआ: के पुत्र, जो याकूब से पद्दनराम में उत्पन्न हुए थे, उनके बेटे पोते ये ही थे, और इन से अधिक उसने उसके साथ एक बेटी दीना को भी जन्म दिया: यहां तक तो याकूब के सब वंश वाले तैंतीस प्राणी हुए।
16 And the sons of Gad; Ziphion, and Haggi, Shuni, and Ezbon, Eri, and Arodi, and Areli. 16 फिर गाद के पुत्र, सिय्योन, हाग्गी, शूनी, एसबोन, एरी, अरोदी, और अरेली थे।
17 And the sons of Asher; Jimnah, and Ishuah, and Isui, and Beriah, and Serah their sister: and the sons of Beriah; Heber, and Malchiel. 17 और आशेर के पुत्र, यिम्ना, यिश्वा, यिस्त्री, और बरीआ थे, और उनकी बहिन सेरह थी। और बरीआ के पुत्र, हेबेर और मल्कीएल थे।
18 These are the sons of Zilpah, whom Laban gave to Leah his daughter, and these she bare unto Jacob, even sixteen souls. 18 जिल्पा, जिसे लाबान ने अपनी बेटी लिआ: को दिया था, उसके बेटे पोते आदि ये ही थे; सो उसके द्वारा याकूब के सोलह प्राणी उत्पन्न हुए॥
19 The sons of Rachel Jacob's wife; Joseph, and Benjamin. 19 फिर याकूब की पत्नी राहेल के पुत्र यूसुफ और बिन्यामीन थे।
20 And unto Joseph in the land of Egypt were born Manasseh and Ephraim, which Asenath the daughter of Potipherah priest of On bare unto him. 20 और मिस्र देश में ओन के याजक पोतीपेरा की बेटी आसनत से यूसुफ के ये पुत्र उत्पन्न हुए, अर्थात मनश्शे और एप्रैम।
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21 And the sons of Benjamin were Belah, and Becher, and Ashbel, Gera, and Naaman, Ehi, and Rosh, Muppim, and Huppim, and Ard. 21 और बिन्यामीन के पुत्र, बेला, बेकेर, अश्बेल, गेरा, नामान, एही, रोश, मुप्पीम, हुप्पीम, और आर्द थे।
22 These are the sons of Rachel, which were born to Jacob: all the souls were fourteen. 22 राहेल के पुत्र जो याकूब से उत्पन्न हुए उनके ये ही पुत्र थे; उसके ये सब बेटे पोते चौदह प्राणी हुए।
23 And the sons of Dan; Hushim. 23 फिर दान का पुत्र हुशीम था।
24 And the sons of Naphtali; Jahzeel, and Guni, and Jezer, and Shillem. 24 और नप्ताली के पुत्र, यहसेल, गूनी, सेसेर, और शिल्लेम थे।
25 These are the sons of Bilhah, which Laban gave unto Rachel his daughter, and she bare these unto Jacob: all the souls were seven. 25 बिल्हा, जिसे लाबान ने अपनी बेटी राहेल को दिया, उस के बेटे पोते ये ही हैं; उसके द्वारा याकूब के वंश में सात प्राणी हुए।
26 All the souls that came with Jacob into Egypt, which came out of his loins, besides Jacob's sons' wives, all the souls were threescore and six; 26 याकूब के निज वंश के जो प्राणी मिस्र में आए, वे उसकी बहुओं को छोड़ सब मिलकर छियासठ प्राणी हुए।
27 And the sons of Joseph, which were born him in Egypt, were two souls: all the souls of the house of Jacob, which came into Egypt, were threescore and ten. 27 और यूसुफ के पुत्र, जो मिस्र में उससे उत्पन्न हुए, वे दो प्राणी थे: इस प्रकार याकूब के घराने के जो प्राणी मिस्र में आए सो सब मिलकर सत्तर हुए॥
28 And he sent Judah before him unto Joseph, to direct his face unto Goshen; and they came into the land of Goshen. 28 फिर उसने यहूदा को अपने आगे यूसुफ के पास भेज दिया, कि वह उसको गोशेन का मार्ग दिखाए; और वे गोशेन देश में आए।
29 And Joseph made ready his chariot, and went up to meet Israel his father, to Goshen, and presented himself unto him; and he fell on his neck, and wept on his neck a good while. 29 तब यूसुफ अपना रथ जुतवाकर अपने पिता इस्राएल से भेंट करने के लिये गोशेन देश को गया, और उससे भेंट करके उसके गले से लिपटा और कुछ देर तक उसके गले से लिपटा हुआ रोता रहा।
30 And Israel said unto Joseph, Now let me die, since I have seen thy face, because thou art yet alive. 30 तब इस्राएल ने यूसुफ से कहा, मैं अब मरने से भी प्रसन्न हूं, क्योंकि तुझे जीवित पाया और तेरा मुंह देख लिया।
31 And Joseph said unto his brethren, and unto his father's house, I will go up, and shew Pharaoh, and say unto him, My brethren, and my father's house, which were in the land of Canaan, are come unto me; 31 तब यूसुफ ने अपने भाइयों से और अपने पिता के घराने से कहा, मैं जा कर फिरौन को यह समाचार दूंगा, कि मेरे भाई और मेरे पिता के सारे घराने के लोग, जो कनान देश में रहते थे, वे मेरे पास आ गए हैं।
32 And the men are shepherds, for their trade hath been to feed cattle; and they have brought their flocks, and their herds, and all that they have. 32 और वे लोग चरवाहे हैं, क्योंकि वे पशुओं को पालते आए हैं; इसलिये वे अपनी भेड़-बकरी, गाय-बैल, और जो कुछ उनका है, सब ले आए हैं।
33 And it shall come to pass, when Pharaoh shall call you, and shall say, What is your occupation? 33 जब फिरौन तुम को बुलाके पूछे, कि तुम्हारा उद्यम क्या है?
34 That ye shall say, Thy servants' trade hath been about cattle from our youth even until now, both we, and also our fathers: that ye may dwell in the land of Goshen; for every shepherd is an abomination unto the Egyptians. 34 तब यह कहना कि तेरे दास लड़कपन से ले कर आज तक पशुओं को पालते आए हैं, वरन हमारे पुरखा भी ऐसा ही करते थे। इस से तुम गोशेन देश में रहने पाओगे; क्योंकि सब चरवाहों से मिस्री लोग घृणा करते हैं॥
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