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Bible English Sentence बाइबिल हिन्दी सेंटेंस
CHAPTER 7 अध्याय 7
(Ch-06) Previous == == Next ( Ch-08)
1 And the LORD said unto Noah, Come thou and all thy house into the ark; for thee have I seen righteous before me in this generation. 1 और यहोवा ने नूह से कहा, तू अपने सारे घराने समेत जहाज में जा; क्योंकि मैं ने इस समय के लोगों में से केवल तुझी को अपनी दृष्टि में धर्मी देखा है।
2 Of every clean beast thou shalt take to thee by sevens, the male and his female: and of beasts that are not clean by two, the male and his female. 2 सब जाति के शुद्ध पशुओं में से तो तू सात सात, अर्थात नर और मादा लेना: पर जो पशु शुद्ध नहीं है, उन में से दो दो लेना, अर्थात नर और मादा:
3 Of fowls also of the air by sevens, the male and the female; to keep seed alive upon the face of all the earth. 3 और आकाश के पक्षियों में से भी, सात सात, अर्थात नर और मादा लेना: कि उनका वंश बचकर सारी पृथ्वी के ऊपर बना रहे।
4 For yet seven days, and I will cause it to rain upon the earth forty days and forty nights; and every living substance that I have made will I destroy from off the face of the earth. 4 क्योंकि अब सात दिन और बीतने पर मैं पृथ्वी पर चालीस दिन और चालीस रात तक जल बरसाता रहूंगा; जितनी वस्तुएं मैं ने बनाईं हैं सब को भूमि के ऊपर से मिटा दूंगा।
5 And Noah did according unto all that the LORD commanded him. 5 यहोवा की इस आज्ञा के अनुसार नूह ने किया।
6 And Noah was six hundred years old when the flood of waters was upon the earth. 6 नूह की अवस्था छ: सौ वर्ष की थी, जब जलप्रलय पृथ्वी पर आया।
7 And Noah went in, and his sons, and his wife, and his sons' wives with him, into the ark, because of the waters of the flood. 7 नूह अपने पुत्रों, पत्नी और बहुओं समेत, जलप्रलय से बचने के लिये जहाज में गया।
8 Of clean beasts, and of beasts that are not clean, and of fowls, and of every thing that creepeth upon the earth, 8 और शुद्ध, और अशुद्ध दोनो प्रकार के पशुओं में से, पक्षियों,
9 There went in two and two unto Noah into the ark, the male and the female, as God had commanded Noah. 9 और भूमि पर रेंगने वालों में से भी, दो दो, अर्थात नर और मादा, जहाज में नूह के पास गए, जिस प्रकार परमेश्वर ने नूह को आज्ञा दी थी।
10 And it came to pass after seven days, that the waters of the flood were upon the earth. 10 सात दिन के उपरान्त प्रलय का जल पृथ्वी पर आने लगा।
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11 In the six hundredth year of Noah's life, in the second month, the seventeenth day of the month, the same day were all the fountains of the great deep broken up, and the windows of heaven were opened. 11 जब नूह की अवस्था के छ: सौवें वर्ष के दूसरे महीने का सत्तरहवां दिन आया; उसी दिन बड़े गहिरे समुद्र के सब सोते फूट निकले और आकाश के झरोखे खुल गए।
12 And the rain was upon the earth forty days and forty nights. 12 और वर्षा चालीस दिन और चालीस रात निरन्तर पृथ्वी पर होती रही।
13 In the selfsame day entered Noah, and Shem, and Ham, and Japheth, the sons of Noah, and Noah's wife, and the three wives of his sons with them, into the ark; 13 ठीक उसी दिन नूह अपने पुत्र शेम, हाम, और येपेत, और अपनी पत्नी, और तीनों बहुओं समेत,
14 They, and every beast after his kind, and all the cattle after their kind, and every creeping thing that creepeth upon the earth after his kind, and every fowl after his kind, every bird of every sort. 14 और उनके संग एक एक जाति के सब बनैले पशु, और एक एक जाति के सब घरेलू पशु, और एक एक जाति के सब पृथ्वी पर रेंगने वाले, और एक एक जाति के सब उड़ने वाले पक्षी, जहाज में गए।
15 And they went in unto Noah into the ark, two and two of all flesh, wherein is the breath of life. 15 जितने प्राणियों में जीवन की आत्मा थी उनकी सब जातियों में से दो दो नूह के पास जहाज में गए।
16 And they that went in, went in male and female of all flesh, as God had commanded him: and the LORD shut him in. 16 और जो गए, वह परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार सब जाति के प्राणियों में से नर और मादा गए। तब यहोवा ने उसका द्वार बन्द कर दिया।
17 And the flood was forty days upon the earth; and the waters increased, and bare up the ark, and it was lift up above the earth. 17 और पृथ्वी पर चालीस दिन तक प्रलय होता रहा; और पानी बहुत बढ़ता ही गया जिस से जहाज ऊपर को उठने लगा, और वह पृथ्वी पर से ऊंचा उठ गया।
18 And the waters prevailed, and were increased greatly upon the earth; and the ark went upon the face of the waters. 18 और जल बढ़ते बढ़ते पृथ्वी पर बहुत ही बढ़ गया, और जहाज जल के ऊपर ऊपर तैरता रहा।
19 And the waters prevailed exceedingly upon the earth; and all the high hills, that were under the whole heaven, were covered. 19 और जल पृथ्वी पर अत्यन्त बढ़ गया, यहां तक कि सारी धरती पर जितने बड़े बड़े पहाड़ थे, सब डूब गए।
20 Fifteen cubits upward did the waters prevail; and the mountains were covered. 20 जल तो पन्द्रह हाथ ऊपर बढ़ गया, और पहाड़ भी डूब गए
21 And all flesh died that moved upon the earth, both of fowl, and of cattle, and of beast, and of every creeping thing that creepeth upon the earth, and every man: 21 और क्या पक्षी, क्या घरेलू पशु, क्या बनैले पशु, और पृथ्वी पर सब चलने वाले प्राणी, और जितने जन्तु पृथ्वी मे बहुतायत से भर गए थे, वे सब, और सब मनुष्य मर गए।
22 All in whose nostrils was the breath of life, of all that was in the dry land, died. 22 जो जो स्थल पर थे उन में से जितनों के नथनों में जीवन का श्वास था, सब मर मिटे।
23 And every living substance was destroyed which was upon the face of the ground, both man, and cattle, and the creeping things, and the fowl of the heaven; and they were destroyed from the earth: and Noah only remained alive, and they that were with him in the ark. 23 और क्या मनुष्य, क्या पशु, क्या रेंगने वाले जन्तु, क्या आकाश के पक्षी, जो जो भूमि पर थे, सो सब पृथ्वी पर से मिट गए; केवल नूह, और जितने उसके संग जहाज में थे, वे ही बच गए।
24 And the waters prevailed upon the earth an hundred and fifty days. 24 और जल पृथ्वी पर एक सौ पचास दिन तक प्रबल रहा॥
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